लालची भाई और उसकी पत्नी, जानिये क्या होता है इनका अंत में..

एक गाव में राम लखन नाम के दो भाई रहते थे. वे दोनों अलग-अलग माताओं के बेटे थे. उसी तरह उन दोनो का स्वभाव भी एक दुसरे से बिल्कुल अलग था. छोटा भाई बहुत ही शांत स्वभाव का था तो बडा भाई उससे कही ज्यादा अलग और लालची था. बडे भाई ने अपने पिता की जायदाद छल-कपट से हळप ली थी.

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लालची भाई और उसकी पत्नी

उसने अपने पिता से कहा था कि, पिताजी आपकी हालत बहुत गंभीर रहती है, कभी भी कुछ भी हो सकता है. मै बडा हु इसलिए आप मेरे नाम पुरी जायजाद कर दिजीये. जब लखन की शादी हो जाएगी तब मैं आधी जायजाद उसके नाम कर दूंगा. उसके पिता का उस पर पुरा भरोसा था कि राम कभी किसी से धोका नही करेगा. इसलिये उसके पिताजी ने पुरी जायदाद राम के नाम पर दिया. 

राम की पत्नी बहुत ही लालची थी. वह अपनी मीठी मीठी बातो से खेतो का पूरा काम लखन के हातो से कर लेती थी. फिर कुछ दिनो बाद राम-लखन के पिताजी की मुत्यू हो गई है. उसके बाद राम की पत्नी लखन से झगडे करने के बहाने खोजती रहती थी.
लखन अपने बड़े भाई राम और उसकी पत्नी से बहुत परेशान हो गया था. एक दिन उन दोनो से तंग आकर लखन ने अपने बड़े भाई से आधी जायदाद मांगी.

तब राम ने कहा, कौनसी जायदाद.. पिताजी ने जायदाद पर बहुत सारा कर्जा लिया था. मैने अपने वर्षो से कमाए हुए पैसे से उनका पूरा कर्जा भरा है. अब वो पूरी जायदाद मेरी है, तेरा इसमें कुछ भी नहीं है. यह सुनते ही लखन के आँखों में आंसू आ जाते है.
रोते हुए वो वहां से दुसरे गाव चला जाता है. उसे उस गाव में एक बहुत अच्छा जमींदार मिलता है. लखन जमींदार के घर में खेती का काम करता है. लखन की इमानदारी और खुद्दारी को देखकर जमीनदार की बेटी उसे पसंद करने लगती है. वो यह बात अपने पिताजी से कहती है, जमींदार भी लखन को बेहद पसंद करता है. तब जमींदार लखन से अपनी बेटी की शादी कर देता है.

दुसरे दिन जमींदार लखन से कहता है कि बेटा मेरा कोई वारिस नही है. इसलिए में अपनी पुरी संपत्ती अपनी बेटी और तुम्हे दे रहा हुं. इसे अब तुम्हे ही संभालना है.

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लखन ने कहा नहीं ससुर जी.. मै मेहनत से कमाने वाला इंसान हुं. इसलिए मै ये संपत्ती नही ले सकता. जमींदार कहता है, मैने पिछले जन्म में कोई पुण्य किया होंगा जो मुझे इतना अच्छा जमाई मिला है. 

उसके बाद लखन एक दिन खेतों में काम करके खाना खाने के लिए एक पेड के नीचे बैठा था. उतने में भगवान एक भिकारी के रूप में आकर उसे कहते है, हे भाई मै बहुत दिनो से भुका हुं. कुछ खाने को मिलेगा क्या.. लखन उसे पुरा खाना देता है. तभी अचानक भगवान भिकारी के रूप से बाहर आते है और कहते है, मै तुम्हारी परीक्षा ले रहा था और तुम अपनी परीक्षा में उत्तीर्ण हुए हो.

इसलिए मै तुमको एक बासुरी देता हु, जिसे बजाकर तुम जो भी मागोगे वो तुम्हे मिल जाएगा. पर इसका गलत इस्तेमाल करने पर तुम्हे जो चीजे मिलेगी, वो सब गायब हो जाएगी. लखन घर जाते ही यह सब बातें अपनी पत्नी को बताता है.

फिर वो कुछ ही दिनो में धनवान हो जाता है. लखन अपने गाव जाकर अपने भाई के घर के सामने एक बहुत ही बडा घर बनाता है. उसका बड़ा भाई राम सोचता है कि, लखन इतनी जल्दी धनवान कैसे बन गया. फिर एक दिन राम लखन से पुछता है.

वाह भाई, तुम तो बहुत जल्दी धनवान हो गये हो, मुझे भी बताव थोडा. तब लखन बताता है, मै एक दिन खेतो में काम करके खाना खाने के लिये एक पेड़ के नीचे बैठा, उतने में एक आदमी आया और मुझसे खाना मागने लगा. तब मैने उसे पुरा खाना दे दिया. फिर अचानक उसने भगवान का रूप ले लिया. उसने मुझे एक बासुरी दी है और कहा तुम इसे बजाकर जो भी मागोगे वो तुम्हे जरूर मिलेगा.

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यह सुनकर राम बहुत खुश हो जाता है और यह बात वो अपनी पत्नी को भी बताता है, तब वो उसे उस पेड़ के नीचे खाना लेकर जाने के लिए कहती है. तब खाना लेकर उस पेड के पास पहुच जाता है. वहां कुछ देर में एक भिकारी आता है और उसे कहता है, भाई बहुत दिनो से भुका हुं, कुछ खाने के लिए दे दो. तब राम को लगता है की लखन ने तो आदमी बताया था, ये तो भिकारी है.

तब राम उससे कहता है, बहुत दिनो से भुके हो तो मै क्या करूँ.. यह कहकर वह उसे भगा देता है. फिर पेड के नीचे बैठे-बैठे उसे नींद लग जाती है. फिर पेड पर से एक आम उसके सिर पर गिरता है और उसकी नींद खुल जाती है. फिर वो खाने का डब्बा पकड़ता है वो उसे हल्का महसूस होता है, फिर वो उसे खोलकर देखता है तो वो डब्बा पूरा खाली रहता है.

फिर अचानक पेड पर से एक बासुरी उसके सामने गिरती है और वो उस बासुरी को घर लेकर आता है. इस बारे में वो अपनी पत्नी को भी बताता है. दोनों बहुत खुश हो जाते है और तरह तरह के सपने देखते है. हम ऐसा करेंगे हम वैसा करेंगे, हम लक्षण से भी बड़ा घर बनायेंगे, आदि.

फिर दुसरे दिन सुबह जब राम वो बासुरी बजाता है तो उस बासुरी में से एक बहुत बड़ा जीन बाहर आता है. तब राम और उसकी पत्नी उसके सामने मुझे ये चाहिए, मुझे वो चाहिए, ऐसे तरह तरह के अपनी ख्वाइसे रखते है. जीन बोलता है तुम लोग मुझे आर्डर दे रहे हो, मै तुम्हारा गुलाम हूँ क्या बे..

उसके बाद वह राम और उसकी पत्नी से बहुत से काम करवाता रहता है. अगर वह लोग काम नहीं करते है तो वह उन्हें बहुत मारता है. अब उस जीन ने उन दोनों को ही अपना गुलाम बना लिया है, वो जैसा बोलता है, ये दोनों वैसे ही करते है. अगर नहीं करें इनकी पिटाई हो जाती है.

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इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है
इस कहानी से हमे यह सीख मिलती है कि, जो लोग लालची और दूसरों के बारे में बुरा सोचने वाले होते है उनके साथ अंत में बहुत बुरा होता है. जो गलत करते हैं, उन्हें उसका परिणाम भुगतना पड़ता है.

Author: Pooja S

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