परिश्रम से ही मिलती है सफलता – Kisan ki ek rochak kahani

परिश्रम से ही मिलती है सफलता. किसान की एक रोचक कहानी. किसान के आलसी बेटों की कहानी, जरुर पढ़ें. Kisan ki ek rochak kahani in Hindi

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Kisan ki ek rochak kahani

परिश्रम से ही मिलती है सफलता – Kisan ki ek rochak kahani in Hindi

कानपूर गाव में एक कन्हय्या नामक किसान रहता था और उसके चार बेटे थे. किसान हर रोज परिश्रम भरा जीवन व्यतित करता था. वह बहुत ही परिश्रमी किसान था पर उसके चारों बेटे बहुत ही आलसी और निक्कमे थे. उनका काम हर वक्त इधर उधर घूमना और बस बातें करना था. उनके पिता उन चारों के निकम्मेपन की वजह से बहुत परेशान थे. उन्हें हमेशा उन चारों बेटों के भविष्य की चिंता सताने लगी थी. 

एक दिन वह रात भर यहीं सोचता रहा कि मेरे बेटे अपना घर कैसे चलायेंगे? उसके बाद एक दिन-एक रात वह इसी ख्यालों में खोया हुआ था, तभी अचानक उसकी पत्नी ने उसे एक उपाय सुझाया. किसान वह उपाय सुनकर कुछ देर सोचने लगा फिर एकाएक खुशी से उछल पड़ा.

अगले सुबह किसान ने अपने चारों बेटो को बुलाकर कहा कि मै और तुम्हारी माँ अब बूढ़े हो गए है. अब हम दोनों दूर तीर्थयात्रा पर जा रहे है. मैंने खेत में धन गाड़कर छिपा रखा है, अगर किसीको कभी जरूरत पड़ गई तो उसे निकालकर उपयोग कर लेना.

गड़े हुए धन की बात सुनकर उसके चारों बेटे खुश हो गए और उन्होने अपने पिताजी को खुशी से तीर्थयात्रा पर जाने के लिए कहा. चारों बेटे मन ही मन खुश हो गए कि अब कुछ दिनों तक पिताजी का बंधन भी नहीं रहेगा. किसान के जाने के बाद कुछ दिनों तक तो सब कुछ सामान्य तौर चलता रहा पर, उसके बाद उनके पास का धन और धान्य समाप्त हो गया.

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अब चारों भाई चिंतित थे, उन्हें अपने पिताजी की कही बात याद आ गई कि जरूरत पड़ने पर खेत में से गाडकर छिपाया हुआ धन निकाल लेना. तब उन्होंने रात में खेत की खुदाई शुरू कर दी. वे चार रात तक खेत की खुदाई करते रहे, लेकिन उन्हें कही भी छुपाया हुआ धन नही मिला. रातभर खेतों में मेहनत करने के बाद वे बहुत थक गए थे. खेत में छुपाया हुआ धन न मिलने के वजह से चारों भाई बहुत निराश हो गए और वे खेत से घर लौट आए.

किसान के परम मित्र हरिनाथ ने पूछा कि आप सब थके हुए क्यों हैं? कारण जानने के बाद हरिनाथ ने उन चारों को सलाह देते हुए कहा कि आप लोगो ने खेत तो खोद ही लिया है, अब उसमे बीज भी डाल दो. चारों भाईयो ने उनकी बात सुनकर ठीक उसी तरह किया. उन चारों भाइयों ने मिलकर खेत में बीज बो दिया. फिर कुछ दिन बाद वहाँ पर अंकुर आने लगे. यह देखकर उन चारों भाईयों के चेहरे पर खुशी छा गई. फिर कुछ दिनों बाद उन्ही खेतों में बहुत ही अच्छी फसल लहराने लगी. यह देखकर किसान के चारों बेटे बहुत खुश हुए.

उसके कुछ दिनों बाद, उन्होंने फसल काटना शुरू कर दिया और फिर वे फसल बाजार में बेचने जा रहे थे. उसी समय, उन चार बेटों की माँ और पिता तीर्थयात्रा से घर लौट आए. तब उन चार बेटों ने अपने माता-पिता के पैर छुए. किसान ने गाड़ी में अनाज के बोरों को देखकर कहा कि अब आपको खेत में गाड़े गए धन का मतलब समझ में आ गया होगा.

यह सुनकर, उन चार बेटों ने अपनी गलती स्वीकार की और अपने माता-पिता से माफी मांगी. उउसके बाद, वे चारों अपने माता-पिता से कहने लगे कि.. पिताजी, अगर हम पहले ही यह काम कर लेते हैं तो आपको ज्यादा परेशानी सहनी नहीं पड़ती. हमारे लिए, आप दोनों ने बहुत दर्द सहा है, इसलिए कृपया हमें क्षमा करें.

इसका तात्पर्य यह होता है की, जो मनुष्य आलसी होता है उनको सुधारने की उम्मीद नही होती ऐसा नहीं है. क्योंकी कोशिश करने वालों की कभी हार नही होती. मनुष्य को अपनी गलती सुधारने की कोशिश करना चाहिए. कोशिश करने वाले एक दिन जरुर कामयाब होते है. 

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इस कहानी में, उनके माता-पिता ने अपने बेटों को सुधारने की बहुत कोशिश की, लेकिन उनके घर से बाहर जाने के बाद, उन्हें पता चला कि वास्तव में जिदंगी का मतलब क्या होता है. जीवन में बिना परिश्रम के कुछ भी संभव नहीं है, परिश्रम करके ही धन कमाया जा सकता है. जब हम परिश्रम ही नहीं करेंगे तो हमें फल कहां से मिलेगा? यह संभव ही नहीं है.

 

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है:

कभी भी आलस न करे, परिश्रम करने से भागे नहीं. परिश्रम करने से कठिन से कठिन कार्य में सफलता हासिल की जा सकती है. सफलता पाने का एकमात्र मार्ग है परिश्रम, कठिन परिश्रम से ही सफलता मिलती है.

Author: Pooja S

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