एक किसान की आत्मकथा : Kisan Ki Atmkatha

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Kisan Ki Atmkatha

एक किसान की आत्मकथा (Kisan Ki Atmkatha)

मै एक किसान हु.. मेरा काम है किसानी करना। मै रोजाना सुबह अपने खेत पर चले जाता हु। वहां दिन भर परिश्रम करता हु। मेरा पूरा जीवन ही किसानी पर निर्भर है। यदि मै खेती-किसानी नहीं करूँगा तो मुझे भूखा ही रहना पड़ेगा। यदि मै खेती-किसानी नहीं करूँगा तो मै अपने परिवार को कैसे चला पाउँगा। यदि मै खेती-किसानी नहीं करूँगा तो मै अपने बच्चों को पढ़ा-लिखा नहीं पाउँगा। मेरी जिंदगी का आधार ही है खेती किसानी।

रोजाना खेतो में सख्त मेहनत करना, दिन हो या रात फसल की देखभाल करना, कई बार सूखे का सामना करना, कई बार भूखा रहना, ऐसी कई तरह की परेशानियों का सामना करना ही मेरा जीवन है। मै कोई लाचार किसान नहीं हु, बल्कि खेती-किसानी करना मेरी ड्यूटी है और मै अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी के साथ निभाता हु। “चाहे वैशाख जेठ की कड़ी धूप हो या फिर अगहन पूष की जाड़े की रात” मै इसमें अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी के साथ निभाता हु।

मेरा परिवार इस बात का इस बात का साक्षी है की मै अपने काम के प्रति कितना कर्तव्यनिष्ट हूँ। मुझे सिर्फ मेरे परिवार की ही नहीं बल्कि मेरे देश की भी फ़िक्र होती है। इसलिए मै आधा भूखा रहकर अपने देशवाशियों के लिए भी अनाज की पूर्ति करता हूँ। मै क्या हु, मै कौन हु, मेरी ड्यूटी क्या है, यह मुझे अच्छी तरह मालुम है। इसलिए मै हमेशा दूसरों के हित में सोचता हु।

मै एक गरीब किसान हु, मुझे कोई भी जीवनोपयोगी वस्तुएं पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलती है, फिर भी मै हमेशा होंठों पे मुस्कान रखे खुश रहने का प्रयास करता हु। कभी कभी मेरे पास खेती-किसानी में फसल लगाने के लिए भी पर्याप्त धन नहीं होता है, तब मेरे सामने एक बहुत बढ़ी मुसीबत खड़ी हो जाती है। फिर भी मै अपनी परेशानी किसी को न दिखाते हुए किसी शाहुकार से लोन लेकर अपनी परेशानी का हल निकाल लेता हु।

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कई बार मै शाहुकारों के कर्जेतले दब जाता हु, जहां से निकलना मेरे लिए मुस्किल हो जाता है, फिर भी मै हार नहीं मानता हु और किसी भी तरह कायम स्थिति पर आ ही जाता हु। मुझे अपने, अपने परिवार, अपने देश के अलावा इस पर्यावरण की भी फ़िक्र रहती है। इसलिए मै हमेशा खेतो में, बाग़ बगीचों में पेड़ पौधे लगाते रहता हु और पर्यावरण का रखरखाव करता हु।

दिन भर खेतो में पुरे परिवार के साथ परिश्रम करना, किसी भी स्थिति में फसल की देखरेख करना, अच्छी फसल पाने के लिए खून-पशीना एक कर देना, यह मेरा रोज का काम है। मै परिश्रम और सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहता हूं।

मै एक भारतीय किसान हु, मेरा रहन-सहन बहुत ही सीधा-साधा है। मुझमें हर परिस्थिति से लड़ने का साहस है तथा आत्म सम्मान की मुझ में कमी नहीं है और “आत्म सम्मान” ये दौलत मुझे मेरे पूर्वजों से मिली है।

 

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Author: Pinki

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