सफलता पाने के लिए जरुर पढ़े चाणक्य की यह बातें

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सफलता पाने के लिए जरुर पढ़े चाणक्य की यह बातें

सफलता पाने के लिए जरुर पढ़े चाणक्य की यह बाते

आज के इस भागदौड़ भरी जिंदगी मे हम किसी और से ज्यादा खुद के प्रति अधिक आकर्षित रहते है। क्योकि हम चाहते है की हम दुनिया में सबसे आगे रहे। इसलिए आज हम आपको चाणक्य की कुछ ऐसी बातों से परिचित कराने वाले है जो आपके जीवन को नया मार्ग दिखाएंगे।

आप जानते होंगे, आचार्य चाणक्य अर्थशास्त्र ग्रन्थ के लेखक है, उन्हें कौटिल्य और विष्णुगुप्त इस नाम से भी जाना जाता है। इन्होने १४ वर्ष के कठिन संघर्ष में बाद २६ साल की उम्र में अर्थशस्त्र, राजनीति और समाज शास्त्र की शिक्षा पूरी की।

उस समय वे तक्षशिला के गुरु आचार्य थे, उनकी चतुर बुध्दि और उनकी प्रशिक्षण के चर्चे पुरे मगध में विख्यात थे। वे एक कठोर और तेजस्वी के समान थे और उनकी प्रशिक्षा भी उतनी ही कठोर थी क्योंकि उनका मानंना था की, जो कठोर प्रशिक्षण को पुरे धैर्य और लगन से पूरा करता है वह समय पर आने वाली हर चुनौती को भी किसी भी परिस्तिथि में स्वीकार कर उसे पूर्ण करने में अति प्रज्वल, सक्षम रहता है।

चाणक्य का कहना है की यदि मनुष्य अपने कर्मो का त्याग कर वह अपने लक्ष्य पर ज्यादा ध्यान लगाता है तो इस श्रीष्टि में उससे बड़ा गुणवान मनुष्य कोई नहीं ह, क्योंकि लक्ष्य ही जीवन का सबसे अनमोल रत्न है जो हमें हमारे जीवन को सुधारने के साथ साथ उसे साकार करने की पॉवर भी प्रदान करता है।

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चाणक्य के मुताबिक मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है जो अपने सोचने की प्रक्रिया से तीनो लोको को जीत सकता है। यदि मनुष्य सोच ले की उसे कोई वस्तु चाहिए और वो उसे अपना लक्ष्य बना ले तो वह उसे किसी भी परिस्थिति मे पाकर ही दम लेगा।

चाणक्य कहते है की, बुद्धिमान व्यक्ति वही है, जो समय के साथ अपने जीवन का मुख बदल देता है, समय के उपरोक्त चलना मूर्खता है। जीवन में संघर्ष करना ही महानता नहीं है, संघर्ष के साथ बुद्धि का उपयोग करके उसे पूर्ण करना ही महानता है।

 

चाणक्य की दी गई सिख जो आपके जीवन बदल देंगे 

वर्तमान समय में मनुष्य स्वयं को सबसे आगे देखना पसंद करता है इसलिए उसे आगे बढ़ने के लिए चाणक्य की नीचे दी गई कुछ जरुरी बाते मनुष्य के जरुर काम आएगी।

१) समस्या का समाधान कैसे पाए:

🔘 यदि हमारे जीवन में संकट आए तो उस संकट को लेकर अपने मन में कोई भी नकारात्मक विचार ना लाये, क्योंकी नकारात्मक विचार ही को संकट को समर्थन करते है। इसलिए संकट के स्थिति में भी हमेशा सकारात्मक विचारो को ही अपने जीवन में प्रवेश करने दे।

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🔘 यदि आपको कोई वस्तु चाहिए तो आपको उसके लिए जोखिम उठानी पड़ सकती है, क्योंकि वेद में कहा गया है की, कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है।


🔘 चाणक्य ने कहा है की, यदि जहर में से भी अमृत निकाल सकते है तो निकाल ले और यदि गन्दगी में सोना हो तो उसे भी पानी से धोकर अपनाना ठीक ही है।


🔘 ज्ञान अगर कोई आपसे कम उम्र या निचले जाती या अन्य कोई दे तो उसे भी जरुर ग्रहण करे।


🔘 आचार्य चाणक्य का कहना है की, निचे दी गई ५ बातो पर कभी विशवास नहीं करना चाहिए। 

  1. नाख़ून और सींग वाले पशुओ पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।
  2. औरत पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।
  3. जिसके पास शस्त्र है उस व्यक्ति पर कतई विश्वास न करे।
  4. नदियों पर विश्वास न करे क्योकि वह कभी भी डूबा सकती है।
  5. नेताओं पर कभी विश्वास न करे जो कभी भी धोका दे सकते है।

🔘 यदि किसी व्यक्ति का व्यवहार आपके लिए बदल जाये तो उस पर कदापि विश्वास न करे, क्योकि उसमे उसकी कोई षड़यंत्र की संभावना अवश्य है। 

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२) खुद को जागृत कैसे करे:

🔘 चाणक्य की निति से खुद को जागृत करने का सबसे पहला मार्ग है दुःख। जी हां दुःख.. कहते है स्वयं को सचेत और अपनों की परख करना हो तो दुःख का ही सहारा लेना चाहिए।


🔘 दुःख में वह शक्ति है जो अच्छे अच्छों की परीक्षा के साथ उनकी औकात पता चल जाती है। दुःख में आपको किसी की दोस्ती या अपनों का अपनापन भी पता चल जाता है। कहते है की, जब कोई मुसीबत में काम आता है वही आपका सच्चा साथी और सच्चा दोस्त भी पहचान आ ही जाता है।


🔘 कोई भी कार्य शुरू करने से पहले खुद से ये तीन प्रश्न अवश्य करे। पहला.. मै यह क्यों कर रहा हु, इस कार्य से क्या परिणाम हो सकते है और क्या मै सफल हो पाउँगा। यदि इन प्रश्नो के उत्तर आपको मिल जाये तो आप उस कार्य को शुरू करे।


🔘 संसार एक कड़वा वृक्ष है और इस वृक्ष के दो ही फल मिठे है.. एक वेदो की सच्ची वाणी और दूसरा बुज़ुर्गो का संगीत।


🔘 कोई भी कार्य एक बार शुरू करे तो उसमें असफलता का मन में डर ना रखे और न ही उसे अधूरा छोड़े, क्योकि निष्ठां से कार्य करने वाले ही जीवन में सुख पाते है। 

 

३) खुद को सक्षम कैसे बनाये:

🔘 खुद को सक्षम बनाने के लिए सबसे पहला मार्ग है की अपने कार्य के आप स्वयं उत्तरदायी बने क्योकि संसार में कोई तुम्हारा मित्र नहीं और ना ही कोई तुम्हारा शत्रु। क्योकि आपके विचारो के उत्तरदायी आप खुद है।


🔘 अगर खुद को आप कुबेर जैसे धनवान समजते है तो उससे व्यय ना करे क्योकि उससे आप कंगाल हो जाओगे।


🔘 भगवान् मूर्तियों में नहीं आपकी अनुभूति में है, क्योकि भगवान् शरीर की आत्मा में है और आपको उसकी ही पूजा करनी चाहिए।

 

Author: Sagar

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