हिरन और शिकारी की एक दर्द भरी कहानी..एक बार जरुर पढ़े

हिरन और शिकारी की एक दर्द भरी कहानी..एक बार जरुर पढ़े, लालची रानी, पशु और पक्षियों का ना करे शिकार

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हिरन और शिकारी की एक दर्द भरी कहानी..एक बार जरुर पढ़े

 

हिरन और शिकारी की एक दर्द भरी कहानी..एक बार जरुर पढ़े 

एक बार की बात है, वसुंधरा नगरी का एक राजा था। कही साल पहले की बात है, युध्द के दौरान राजा को सिंहासत में ये नगरी मिली थी।

राजा की पाच रानीया थी, पर राजा अपनी बड़ी रानी से ज्यादा प्रेम करता था, इसलिए वो अपनी पत्नी की हर ख्वाहिश पूरी करता था। बड़ी रानी का नाम वसुंधरा था, इसलिए राजा ने अपनी रानी के नाम पर वसुंधरा नगरी का नाम रख दिया था। राजा की बड़ी रानी को अलग-अलग व्यंजन खाना बहुत पसंद था। रानी खाने के मामले में बहुत ही लालची थी। रानी की एक दासी भी थी जो उसके मायके से आयी थी।एक दिन राजा किसी काम से दुसरे राज्य में छान बिन करने गये थे और रानी अपनी दासी के साथ बगिचे में टहेल ने गयी थी। रानी की दासी बहुत चालाक थी। कुछ समय के बाद रानी को हिरन का झुंड उस बाग़ में आते दिखा, रानी को उस झुंड मे से एक हिरन बहुत पसंद आ गई। उस हिरन को देखकर उसके मुह में पानी आ गया। जैसे रानी हिरन को पकडने के लिए दौडी तो हिरन छलाग लगाकर भाग गई और रानी नाराज होकर महल में चली गई।

दुसरे दिन दासी ने रानी से कहा.. महारानी.. कहते है हिरन का मास बड़ा ही स्वादिष्ट लगता है, एक बार जो खाएगा वो बार-बार खाता रहेगा। रानी बोली.. अच्छा इतना स्वादिष्ट होता है हिरन का मास.. तो फिर ठीक है आज महाराज को हिरन पकडने के लिए कहती हु। तब रानी दासी को राजा के पास भेजती है, दासी, रानी की हिरन खाने की ख्वाहिश राजा को बताती है।

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राजा फौरन प्रधान को बुलाता है और कहता है.. प्रधान हमारे नगर के किसी एक उत्तम शिकारी को बुलाओ उसके बाद प्रधान शिकारी को बुलाता है। शिकारी राजमहल में उपस्थित होता है और कहता है बताईये महाराज क्या हुकुम है.. राजा कहता है.. शिकारी हमारी रानी को एक हिरन का मास खाना है, रानी जिस हिरन को लाने के लिए कहेगी तुम उस हिरन का शिकार करके लाओ। तब रानीने शिकारी को उस हिरन के बारे बताया जो हिरन रानी को पसंद आई थी और कहती है देखो शिकारी.. वही हिरन मुझे चाहिए।

शिकारी शिकार के लिए निकलता है, उसे वो हिरन का झुण्ड और वो हिरन दिखाई देती है, जो रानी ने बताई थी। शिकारी हिरन के पीछे दौड़ता है पर हिरन छलांग लगाकर वहा से भाग जाती है। फिर दुसरे दिन शिकारी नदी के किनारे हिरन को पानी पिते देखता है और अगले दिन शिकारी एक पेड़ पर बैठ कर हिरन का इंतजार करता है और सोचता है कब मै हिरन को पकड के महाराज के पास ले जाऊगा। तभी हिरन पानी पिने आती है शिकारी हिरन पर तीर चलाता है हिरन सतर्क हो जाती है और भागने लगती है शिकारी कहता है रुक जाव तुम मेरे हाथ से बच नही पाओगे।

हिरन कहती है.. हे शिकारी मुझे छोड़ दो, मुझे मेरे बच्चे को दूध पिलाने जाना है और मेरा पति बीमार है उसका भी मुजे ही ध्यान रखना है। शिकारी बोला.. नही.. तुम मुझे अपनी मीठी-मीठी बातो में फसा नही सकती। हिरन बोली.. हे शिकारी मुझे एक बार अपने बच्चे और पति से मिलने दो, फिर मै तुमारे साथ चलुगी।

शिकारी हिरन के साथ जाता है, हिरन गुफा में जाकर बच्चे को देखकर कहती है, एक बार तुझे अच्छे से देखलू मेरे लाल.. बच्चा बोला क्या हुआ माँ, क्या बात है, आप ऐसे क्यू बोल रही है, हिरन अपने पति से कहती है, आप जल्दी से ठीक हो जावो.. आपको हमारे बच्चे का ख्याल रखना है। उसका पति कहता है.. क्या हुआ.. तुम ऐसे क्यू कह रही हो।

तब हिरन अपने पति को रोते हुए सब कुछ बताती है, तब उसका पति कहता है, तो क्या हुआ.. हम यहाँ से दूसरी जगह पर चले जाएगे। पर हिरन कहती है.. नही.. मै शिकारी को वादा करके आयी हु, मै अपना वादा नही तोड सकती। यह कहकर हिरन जाने लगती है, उसका पति कहता है.. रुको.. तुम नही जाओगी, मै शिकारी के साथ जाउगा.. वैसे भी मेरी हालत इतनी अच्छी नही है की मै हमारे बच्चे को पाल सकूँगा। वैसे महाराज मेरे जैसा बड़ा शिकार देखकर खुश हो जायेंगे। बच्चा कहता है, आप नही.. मै जाउगा शिकारी के साथ.. माँ तुम पिताजी का ख्याल रखना, मै छोटा हु इस लिए महाराज और महारानी को मेरा मास अधिक स्वादिष्ट और खाने में मुलायम लगेगा।

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उन तीनो की बाते सुनकर, तीनो का एक दुसरे के प्रति स्नेह देखकर शिकारी के आँखों में आसू आ गए, उसे लगता है, मै कितना पापी हु, जो एक परिवार को एक दुसरे से अलग कर रहा हु, उसे अपने गलती का अहसास हो जाता है। तब शिकारी हिरन से कहता है.. आप लोग कहीं नहीं जायेंगे, अब मै किसी को एक दुसरे से अलग नहीं करूँगा.. मै महाराज के पास जाकर सब समझा दूंगा.. यह कहकर शिकारी वहा से रोते हुए चला जाता है।

उसके बाद शिकारी राजा के पास जाकर कहता है.. महाराज मै आपका काम नही कर सकता, मै अपने शिकारी पद का त्याग कर रहा हु। राजा ने कहा.. क्या हुआ शिकारी तुम ऐसे क्यों बोल रहे हो और तुम हिरन भी नही लाए, शिकारी राजा को रोते हुए सब कुछ बताता है और कहता है, महाराज जैसे हम इंसान आपकी प्रजा है.. वैसे ही पशु और पंक्षी भी आपकी प्रजा है, आपका कर्तव्य है की आप अपने प्रजा की रक्षा करो ना की भूक मिटाने के लिए उनका शिकार ना करो। राजा को अपनी गलती का अहसास हो जाता है, उसके बाद महाराज अपने रानी और दासी को उनके इस लालची बर्ताव के लिए सजा देते है।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की, जिस तरह मनुष्य का परिवार होता है, उसी तरह पशु पक्षियों का भी परिवार होता है। यदि हमारे परिवार से किसी भी मृत्यु हो जाती है तो हम पर क्या बीतती है, आप खुद समज सकते है। वैसे अगर हम किसी पशु या पक्षी का शिकार करते है तो उनके परिवार की क्या हालत होती होंगी इसका अहसास भी हमें होना चाहिए। जिस तरह हम एक जिव है, उसी तरह पशु पक्षियों का भी जीवन होता है। इसलिए प्लीज.. पशु पक्षियों का शिकार ना करे, उनके इमोशन की भी क़द्र करे।

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