वात का घरेलू इलाज | वात रोग से छुटकारा पाने का असरदार इलाज | Vat ka ilaj

आज हम इस आर्टिकल में एक महत्वपूर्ण Health tips के बारे में जाननेवाले है। आज का टॉपिक है, वात का घरेलु इलाज : Vat ka gharelu ilaaj, Vat rog ka gharelu upchaar, ilaj. वात रोग को जड़ से मिटाने का रामबाण इलाज।

आजकल वात रोग की समस्या अधिक दिखाई दे रही है। वात रोग की समस्या किसी भी उम्र के किसी भी पुरुष और महिला को हो सकती है। जानकारी के अनुसार वात रोग की समस्या ज्यादातर अधिक उम्र के लोगों में अधिक देखी गई है। वात रोग का सही तरीके से इलाज ना होने के कारण इस रोग से पीड़ित 50% व्यक्ति सदैव परेशान रहते हैं।

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मनुष्य के शरीर की रचना मांसपेशियां, हड्डियां, एवं जोड़ों से की गई है वात रोग इन्ही जोड़ों का रोग है। वात रोग जिसमें जोड़ों में दर्द, गठिया, कमर दर्द, यूरिक एसिड का बढ़ना आदि विशेष है। शरीर की कमजोरी वात रोग को अपनी ओर आकर्षित करती है। आयुर्वेद के अनुसार वात रोग 80 प्रकार के होते हैं लेकिन सभी वात रोगों में जोड़ों का दर्द विशेष है।
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वात रोग के लक्षण

➛ शरीर में रूखापन होना
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➛ शरीर में जकड़न और दर्द महसूस होना
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➛ अधिक सिर दर्द करना, सिर में भारीपन महसूस होना
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➛ जोड़ों में दर्द होना
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➛ कम सुनाई देना, बहरापण महसूस होना।
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➛ मांसपेशियों में दर्द व सूजन होना

➛ हड्डियों के जोड़ों में सूजन आना
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➛ रक्त में एसिड और कैल्शियम तत्वों की अधिकता वात रोग होने का कारण
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➛ शरीर में कमजोरी के कारण
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➛ युवावस्था में की हुई गलतियो के कारण
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➛ अधिक आलस के कारण
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➛ लम्बे समय तक बीमार रहने के कारण
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वात रोग से छुटकारा पाने के घरेलु व प्रभावशाली तरीके

प्राचीनकाल से हमारे पूवजो ने जिन जड़ी-बूटियों के प्रयोग से अपने शरीर की निगरानी की है उन्हें हम लगभग भूल ही गए है। आज हम वही तरीके जानने वाले है जो हमारी दादी नानी या बड़े बुजुर्ग प्रयोग करते थे।

प्रयोग 1 – वात का इलाज 

➛ 200 ग्राम लहसुन ले और उसे छील कर साफ कर ले।

➛ अब पुरे लहसुन को पीस ले।
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➛ अब 50 ग्राम गाय के दूध का घी ले और 4 लीटर गाय दूध ले।
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➛ अब 200 ग्राम लहसुन, 50 ग्राम गाय के दूध का घी 4 लीटर गाय दूध गाढ़ा होने तक पकाये।
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➛ अब उसमे 400 ग्राम गाय के दूध का घी और 400 ग्राम मिश्री तथा सोंठ, काली मिर्च, दालचीनी, पीपर, पीपरामूल, तमालपात्र, वायविडंग, नागकेशर, च्यवक, अजवायन, चित्रक, लौंग, दारुहल्दी, रास्ना, देवदार, हल्दी, पुष्करमूल, गोखरू, देवदार, विधारा, अस्वगंधा, पुनर्नवा, शतावरी, कौचा के बीज का चूर्ण, नीम और सोआ इन सभी चीजों को 3-3 ग्राम मिलाये।
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➛ अब मिश्रण को हल्की-हल्की आंच पकाये और उसे चम्मच से हिलाते रहे।➛ जब मिश्रण से घी छूटने लगे और मिश्रण गाढ़ा बन जाये तो उसे निकाल ले और ठंडा होने के बाद काच के बर्तन में बंद करके रख दे।
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➛ अब इस मिश्रण को सुबह-शाम 10 से 20 ग्राम गाय के दूध के साथ सेवन करें।
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➛ जब तक पूरा मिश्रण समाप्त ना हो तब तक इस मिश्रण का सेवन नियमित रूप से जारी रखे, वात के रोग की समस्या से छुटकारा मिल जायेगा।
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➲ वात के रोगी को कम से कम 4-5 दिन फलो का रस (मोसंबी, अंगूर, संतरा, निम्बू) पीना जरुरी चाहिए और 10 दिन तक 1-2 शहद चम्मच चाटना चाहिए।
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➲ वात के रोगी को खाने में पालक, दूध, टमाटर और गाजर का अधिक सेवन करना चाहिए।
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➲ वात के रोगी को रोजाना 10-12 मेथीदाना और थोड़ी सी अजवायन का सेवन करना चाहिए।
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➲ वात के रोगी के शरीर पर तिल के तेल से मालिश करने से वात का जल्द ठीक हो सकता है।
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➲ धुप में बैठकर मालिश करने से वात का रोग जल्द ठीक हो जाता है।
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Note : इस वेबसाइट के सभी लेख लोगों के अनुभवों के आधार पर तथा आयुर्वेद के उपायों का परीक्षण किए गए प्रयोगों के आधार पर तैयार किए गए हैं। कृपया कोई भी उपाय प्रयोग करने से पहले किसी अच्छे आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।
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